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कुछ चेहरों को देखने का ख़्वाब होता हैं

कुछ चेहरों को देखने का ख़्वाब होता हैं  वो ना मिले तो बरसों तक ये दिल बेताब होता हैं  मुलाक़ात को तरसा हमारा आफ़ताब होता हैं  इंतज़ार में गुजरता मेहताब होता हैं  उनके अलावा दरिया भी मिल जाए अगर दीवाने को तो वो मामूली आब होता हैं  इश्क़ में ना बहकना ऐ लोगों हक़ीक़त में ये सारी उम्र ख़राब होता हैं  इश्क़ में नशा हैं इब्राहीम उसके आगे फीका कुल शराब होता हैं कुछ चेहरों को देखने का ख़्वाब होता हैं