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वो ख्वाब ख़ुशी की हैं

हर वक़्त वो ख्वाब ख़ुशी की हैं  कभी आँखों में सर्द तो कभी नमी-सी हैं  जैसे पलकों में कोई तस्वीर जमी-सी हैं  हकीक़त में वो शख्स अजनबी-सी हैं  खो गया जो वक्त के तकाज़ो से  इब्राहीम उस की जहाँ में कमी-सी हैं 

तू मेरे आंगन में आ जाए

कुछ इस तरह तू मेरे रहन सहन में आ जाए  शाम सबेरे तेरा नाम मेरे जहन में आ जाए  अगर सोच लूं तेरे बारे में तो फूलों की खुश्बू गगन में आ जाए ऐ काश के एक रोज़ तू मेरे आंगन में आ जाए  ख़ुदा का करम हुआ तो मेरा सनम मुझसे मिलने इस सावन में आ जाए 

कुछ चेहरों को देखने का ख़्वाब होता हैं

कुछ चेहरों को देखने का ख़्वाब होता हैं  वो ना मिले तो बरसों तक ये दिल बेताब होता हैं  मुलाक़ात को तरसा हमारा आफ़ताब होता हैं  इंतज़ार में गुजरता मेहताब होता हैं  उनके अलावा दरिया भी मिल जाए अगर दीवाने को तो वो मामूली आब होता हैं  इश्क़ में ना बहकना ऐ लोगों हक़ीक़त में ये सारी उम्र ख़राब होता हैं  इश्क़ में नशा हैं इब्राहीम उसके आगे फीका कुल शराब होता हैं कुछ चेहरों को देखने का ख़्वाब होता हैं