वो ख्वाब ख़ुशी की हैं

हर वक़्त वो ख्वाब ख़ुशी की हैं 
कभी आँखों में सर्द तो कभी नमी-सी हैं 

जैसे पलकों में कोई तस्वीर जमी-सी हैं 
हकीक़त में वो शख्स अजनबी-सी हैं 

खो गया जो वक्त के तकाज़ो से 
इब्राहीम उस की जहाँ में कमी-सी हैं 


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