हर वक़्त वो ख्वाब ख़ुशी की हैं कभी आँखों में सर्द तो कभी नमी-सी हैं जैसे पलकों में कोई तस्वीर जमी-सी हैं हकीक़त में वो शख्स अजनबी-सी हैं खो गया जो वक्त के तकाज़ो से इब्राहीम उस की जहाँ में कमी-सी हैं
कुछ इस तरह तू मेरे रहन सहन में आ जाए शाम सबेरे तेरा नाम मेरे जहन में आ जाए अगर सोच लूं तेरे बारे में तो फूलों की खुश्बू गगन में आ जाए ऐ काश के एक रोज़ तू मेरे आंगन में आ जाए ख़ुदा का करम हुआ तो मेरा सनम मुझसे मिलने इस सावन में आ जाए