संदेश

फ़रवरी, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वो ख्वाब ख़ुशी की हैं

हर वक़्त वो ख्वाब ख़ुशी की हैं  कभी आँखों में सर्द तो कभी नमी-सी हैं  जैसे पलकों में कोई तस्वीर जमी-सी हैं  हकीक़त में वो शख्स अजनबी-सी हैं  खो गया जो वक्त के तकाज़ो से  इब्राहीम उस की जहाँ में कमी-सी हैं 

तू मेरे आंगन में आ जाए

कुछ इस तरह तू मेरे रहन सहन में आ जाए  शाम सबेरे तेरा नाम मेरे जहन में आ जाए  अगर सोच लूं तेरे बारे में तो फूलों की खुश्बू गगन में आ जाए ऐ काश के एक रोज़ तू मेरे आंगन में आ जाए  ख़ुदा का करम हुआ तो मेरा सनम मुझसे मिलने इस सावन में आ जाए